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एक छोटी सी नदी में तीन मछलियाँ रहती थी। प्रत्येक मछली एक अलग रंग की थी – लाल, नीली और पीली। फिर भी ये तीनों मछलियाँ एक दूसरे के साथ मिलझूल कर रहती थी। 

एक गरीब किसान की कहानी: भाग्य का सही मूल्य

रामचरण अपने खेतों में और अच्छे से काम करना शुरू किया वह दिन रात मेहनत करता रहा और पौधों की देखभाल में विशेष ध्यान देता रहा। तभी एक किसान आकर बोला, अरे भाई क्या कर रहे हो इन पौधों की देखभाल करने से क्या बारिश हो जाएगी।

गीता को एक लाख रुपये मिले। उसने अपने माता-पिता को पैसे दिए और उन्हें एक नया घर खरीदा। 

दोनों किसानों को पुनः उसी गांव में जन्म मिला। समय बीता। दोनों बड़े हुए। पहला किसान जिसने अपने चारों ओर धन की और किसी को कुछ न देने की कामना की थी, वह उस गांव का सबसे बड़ा भिखारी बना। हर कोई उसकी झोली में धन डालता किन्तु उसे किसी को कुछ भी न देना पडता। 

जब वह कुछ दिन बाद विद्यालय पहुंचा वहां, प्रधानाचार्य ने उन सभी बालकों को बुलाया जिन्होंने परेड में भाग नहीं लिया था। इस पर रमेश का नाम नहीं पुकारा गया , बाकी सभी विद्यार्थियों को उनके अभिभावक को लाने के लिए कहा गया। रमेश ने सोचा कि मेरा नाम प्रधानाचार्य ने नहीं बोला लगता है वह भूल गए होंगे। रमेश प्रधानाचार्य के ऑफिस में गया और उसने प्रधानाचार्य से कहा कि मैं भी उस दिन परेड में नहीं आया था।

दूध का कटोरा बिल के सामने रखने के थोड़ी देर बाद जब सर्प दूध पीने बाहर निकला तो उसने उस पर लाठी से प्रहार किया। सर्प लाठी के प्रहार से तो बच गया किन्तु क्रुद्ध हो गयाऔर फन फैलाकर किसान के पुत्र को डस लिया। 

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इस कहानी से हम सभी को यही शिक्षा मिलती है की हमे अपने भाग्य और किस्मत के भरोसे रहकर खुद को कोसने के बजाय हमे लोगो के लिए यदि जीना शुरू करते है तो निश्चित ही ईश्वर हमारे साथ हमेसा होता है और ऐसा हम तभी कर सकते है जब हम अपनी सोच से बाहर निकलकर दुसरे के लिए जीना शुरू करते है

रामू की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती थी और अचानक एक kahani बार तेज बारिश होने के कारण रामू की फसलें पूरी तरह से नष्ट। और यह देख रामू अत्यंत दुखी हो जाता है क्योंकि रामू का पूरे परिवार को बचाने का एकमात्र स्रोत व फसलें हुआ करती थी, जिससे उसका दिल टूट गया और रामू निराश हो गया। 

पोता खूब मन लगाकर उन कहानियों को सुनता। उस नन्हे से पोते का नाम श्याम था। घर में महंगे महंगे चीनी – मिट्टी और अन्य क्रोकरी के समान थे।

ओह, यह सब ठीक है! वे मुझे पकड़ नहीं पाएंगे क्योंकि मैं उनके लिए बहुत जल्दी हूं।इसके अलावा, हमारे पास वह सब खाना है जो हमें यहाँ चाहिए

एक रात जब वह नगर घूम कर आया तो अचानक जोर से बारिश होने लगी। उसने देर किए बिना एक गरीब के घर का दरवाजा खटखटाया। राजा के दरवाजा खटखटाने के बाद घर से एक व्यक्ति निकला। वह एक गरीब किसान था, जो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था।

तो साधू की बातो को सुनकर हामी भर दी और किसान बोला “हां महाराज हमारे साथ कुछ ऐसा ही है अब आप ही चाहो तो आपके आशीर्वाद से शायद हमारी किस्मत बदल जाए”

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