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गधे को पीटकर जल्द ही बगीचे से बाहर खदेड़ दिया गया। “ओउ-ओउ-ओउ!
राम की कहानी से यह सीख मिलती है कि मेहनत और लगन से कोई भी मुश्किल का सामना कर सकता है।
मित्रों, ईश्वर ने हमें जो दिया है उसी में संतुष्ट रहना आवश्यक है। अक्सर देखा है कि हमें हमेशा भगवान से शिकायत रहती है कि हमें यह नहीं दिया, वह नहीं दिया। अगर हम थोड़ा रुककर यह सोचें कि उस दयालु परमात्मा ने हमें कितना कुछ दिया है। तो हम सिर्फ उसका धन्यवाद ही देंगे।
कुछ ही दिनों बाद वो शेर जंगल में शिकारी द्वारा बिछाए गए एक जाल में फंस जाता है। शेर उस जाल से निकलने की बहुत कोशिश करता है पर वो निकल नहीं पाता। जिसके बाद वो दहाड़ना शुरू कर देता है। ये आवाज़ उस चूहे तक पहुंच जाती है और वो शेर को बचाने के लिए वहाँ पहुँच जाता है।
एक दिन अकबर अपने प्रिय बीरबल के साथ शाही बाग़ की सैर के लिए गए। चारों ओर हरियाली को देखकर अकबर को बहुत आनंद आया। कुछ देर बाद सैर करते करते राजा कहने लगा कि, मेरा तो इस हरी भरी हरियाली को देखकर मन कर रहा है कि हम हरे घोड़े पर बैठकर इस हरे बगीचे में घूमे। उन्होंने बीरबल से कहा, “बीरबल मुझे हरे रंग का घोड़ा चाहिए”। उसने बीरबल को आदेश देते हुए कहा कि ‘मैं तुम्हें आदेश देता हूं कि, तुम सात दिनों के अंदर हमारे लिए एक हरे घोड़े का इंतजाम करो’।
एक समय की बात है, पहाड़ियों और हरे-भरे खेतों के बीच बसे एक अनोखे गाँव में, गोपी नाम का एक गरीब किसान रहता था। गोपी पूरे गाँव में अपनी अटूट कार्य नीति और दयालु हृदय के लिए जाना जाता था। वह अपनी पत्नी, सरिता और अपने तीन बच्चों, सुरेश, नरेश और छोटी लवली के साथ एक साधारण झोपड़ी में रहता था। अपने सीमित संसाधनों के बावजूद, वे एक खुश और संतुष्ट परिवार थे।
एक दिन की बात है दोपहर का समय था किसान खेतो से आकर अपने घर पर अपनी पत्नी के साथ खाना खाने जा रहा था की इतने में एक साधू महाराज भिक्षा मागते हुए उसके दरवाजे पर पहुचे और भिक्षा मागने लगे तो इतने में किसान घर के बाहर आया और बोला “साधू महाराज हम सभी पहले से इतने गरीब है और किसी तरह अपना जीवन गुजार रहे है और ऐसे में हम आपको कहा से दान दे, हमारा साथ तो ऊपर वाला भी छोड़ चुका है”
अरुण गर्मी की छुट्टी में अपनी नानी के घर जाता है। वहां अरुण को खूब मजा आता है, क्योंकि नानी के यहाँ आम का बगीचा है। वहां अरुण ढेर सारे आम खाता है और खेलता है। उसके पांच दोस्त भी हैं, पर उन्हें अरुण आम नहीं खिलाता है।
श्याम अपने घर मार्कशीट लेकर गया जिस पर उसके माता-पिता ने देखा और बहुत उदास हुए। उन्हें उदासी हुई कि एक मेरा बेटा इतना अच्छा पढ़ने में है और दूसरा इतना नालायक। श्याम किसी भी विषय में पास नहीं हो पाया।श्याम के माता -पिता को बहुत दुखी हुई उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा मगर अंदर ही अंदर वह बहुत दुखी होते रहे।
अब उस व्यक्ति के पास दो गांव हैं और पचास से अधिक बकरियां भी।
अगले दिन बीरबल ने सभी नौकरों को kahani hindi story सम्राट के दरबार में फिर से बुलाया। उसने देखा कि एक नौकर की छड़ी दूसरों की तुलना में दो इंच छोटी थी।
एक बार उसे किसी कार्य से दूसरे गांव जाना पड़ा। इसलिए उसने अपने पुत्र को खेत में वृक्ष के नीचे बने बिल के पास मिट्टी के कटोरा में दूध रखने का कार्य सौंपा और वह दूसरे गांव की यात्रा के लिए निकल पड़ा। उसका पुत्र आज्ञा अनुसार दूध का कटोरा सर्प के बिल के सामने रखकर घर चला गया।
वही घर में जब बच्चों के पिता को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो वह जंगल में अपने बच्चों को ढूंढ़ने निकल गए। अपने पिता को सामने देखकर बच्चे भाग कर उनके पास गए। पिता ने उनसे वादा किया कि आगे से वह ऐसा कभी नहीं करेंगे। बच्चे ख़ुशी-ख़ुशी अपने पिता के साथ घर की ओर चल पड़े।
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